ना देर कर ओ पुजारी मुझे माँ से मिला दे
आया हूँ मैं पहली बारी माँ के दर्शन करा दे
मैं आया नहीं हूँ बुलाया है माँ ने
नसीबा मेरा खुद जगाया है माँ ने
अगर सोइ है माँ भवन में उसे जा के जगा दे
फूलों से कर लूँ मैं श्रृंगार माँ का
पलकों में भर लूँ मैं दीदार माँ का
चरणों में माँ वैष्णो के दो घडी तू बिठा दे
जिस पल हो माँ से मुलाकात मेरी
चंचल हो मैया से जब बात मेरी
आये ना कोई गुफा में तू ये सब को बता दे