सारे बोलो जय जयकार मईया ने दर खोल दिया
माँ के दर पे झुके संसार मईया ने दर खोल दिया
दुखियो का जग में सहारा बन आ गई
डूबती नैया का किनारा बन आ गई
मईया बांटती सबको प्यार मईया ने दर खोल दिया
जुल्म सितम वाले ताले मईया तोड़ती
दर के भिखारीयों को खाली नही मोड़ती
मईया करती भव से पार मईया ने दर खोल दिया
देखो माँ के चेहरे पे कुदरती नूर है
दर्शन करने से मिलता सरूर है
मईया बांटती खुशियां हजार मईया ने दर खोल दिया
जो भी माँ के चरणों में सिर को झुकायेगा
मन चाहा वरदान दाती से वो पायेगा
मईया सबको करे स्वीकार मईया ने दर खोल दिया
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