रण में कूद पड़ी महाकाली
काले अस्त्र काले शास्त्र
मुंडमाल गल डाली
जय काली जय काली जय काली माँ
जय काली जय काली महाकाली माँ
महिषासुर ने क्रोध बढ़ाया
दुखी देवता सब को डराया
सेना ले कर लड़ने आया
माँ ने दृष्टि डाली
योगिनियों ने शोर मचाया
भैरों ने खप्पर भरवाया
तीर बाण त्रिशूल गदा से
कोई बचा ना खाली
मदिरा पी के माँ पे झपटा
पास सिंह के आ के रपटा
पूंछ घुमा के शेर ने पटका
बकने लगा वो गाली
नही रुकी त्रिशूल की माया
क्रोध में माँ ने गिराया
गिर के कभी वो उठ नहीं पाया
देव बजाएं ताली
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