मेरी बिगड़ी बनाने को मेरी जगदम्बे आएगी
मेरी उजड़ी बसाने को मेरी जगदम्बे आएगी
ये स्वार्थ से भरी दुनिया किसी का दर्द क्या जाने
कोई निराश जीवन से है कोई सच क्या माने
मुझे धीरज धराने को मेरी जगदम्बे आएगी
मुझे माँ का भरोसा है मुझे माँ का सहारा है
भवानी की दया से ही मेरा चलता गुज़ारा है
मेरी मुश्किल हटाने को मेरी जगदम्बे आएगी
पवन का रूप धर आई जब बनिए ने पुकारा था
भक्त ध्यानु का हर इक काम माँ ने संवारा था
मेरी लाज बचने को मेरी जगदम्बे आएगी
मैं भक्ति छोड़ अम्बे की किसी का नाम क्यों ध्याऊँ
सहारा छोड़ जननी का किसी की शरण क्यों जाऊं
मुझे रस्ता दिखने को मेरी जगदम्बे आएगी
पहाड़ों की गुफाओं में भवन माँ का निराला है
ठचमन ये वैष्णो ही चंडी महाकाली ज्वाला है
मुझे दर्शन दिखने को मेरी जगदम्बे आएगी